“मैं और UPSC: एक साधारण छात्र की असाधारण तैयारी की कहानी” 🌿
🌿 “मैं और UPSC: एक साधारण छात्र की असाधारण तैयारी की कहानी” 🌿
प्रस्तावना:
मैं गाँव का एक सामान्य छात्र हूँ — न कोई अंग्रेज़ी मुझमें खास है, न कोई शहरी सुविधा। लेकिन एक सपना है — सच्चा, तेज़स्वी और देशभक्ति से भरा: “एक दिन मैं UPSC क्लियर करूंगा।”
यह ब्लॉग मेरे जैसे हज़ारों युवाओं के लिए है, जो सीमित साधनों के बावजूद असीम सम्भावनाओं से भरे हैं।
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🔹 1. शुरुआत – जब सपना अंकुर बना
कक्षा 10वीं में गाँव के स्कूल के बाहर एक अफ़सर साहब की गाड़ी देखी थी — लाल बत्ती नहीं थी, पर चेहरे पर गर्व था। वहीं से UPSC नाम मेरे मन में बस गया।
सबसे पहला कदम था – सिलेबस समझना।
मैंने UPSC की आधिकारिक वेबसाइट से सिलेबस डाउनलोड किया, प्रिंट कराया, और हर दिन उसे पढ़ा। वह सिलेबस अब मेरी पूजा की किताब बन चुका था।
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🔹 2. किताबें – मेरी हथियार
NCERT से मैंने शुरुआत की।
पुरानी किताबें लाइब्रेरी से मंगाई। अंग्रेज़ी कठिन लगी, तो हिंदी संस्करण लिया।
एक-एक अध्याय को इस तरह पढ़ा जैसे वह मेरी परीक्षा नहीं, बल्कि मेरी नियति तय कर रहा हो।
इसके बाद कुछ ज़रूरी किताबें:
इतिहास – स्पेक्ट्रम
राजनीति – लक्ष्मीकांत
भूगोल – NCERT + G.C. Leong
अर्थव्यवस्था – संजीव वर्मा
पर्यावरण – शंकर IAS
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🔹 3. अखबार – मेरी खिड़की दुनिया से
हर सुबह 6 बजे “The Hindu” उठाता, शब्दों के अर्थ खोजता और उस पर सोचता — “अगर मैं अफ़सर होता तो क्या करता?”
करेंट अफेयर्स की छोटी डायरी बनाकर रोज़ अपडेट करता।
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🔹 4. उत्तर लेखन – जब डर को शब्द दिए
पहले उत्तर लिखना नहीं आता था। हाथ काँपते थे, विचार उलझते थे।
फिर मैंने एक डायरी बनाई:
प्रत्येक GS पेपर से एक प्रश्न
और हर दिन बस एक उत्तर।
धीरे-धीरे शब्द सरल हुए, विचार गहरे और आत्मविश्वास दृढ़।
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🔹 5. वैकल्पिक विषय – आत्मा से जुड़ा
मैंने समाजशास्त्र (Sociology) चुना, क्योंकि यह मुझे मेरे समाज को समझने का अवसर देता था।
इस विषय ने मुझे मेरे ही गाँव, जाति, वर्ग और संस्कृति पर गहराई से सोचने को विवश किया।
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🔹 6. संघर्ष – जब सपनों पर धूल जमी
कई बार मन टूटा। दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया, रिश्तेदारों ने कहा “सरकारी नौकरी छोड़ो, कुछ और कर लो।”
पर हर बार मैं माँ के चेहरे की उम्मीद पढ़ता, और फिर से किताबों की ओर लौटता।
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🔹 7. परीक्षा का दिन – जब सब कुछ एक पल में सिमट गया
प्रीलिम्स में पसीना बहा, Mains में रातों की नींद खोई, और इंटरव्यू में खुद को पाया।
मैंने सच बोलने का साहस किया, और विनम्रता के साथ अपनी कहानी बताई।
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🔹 8. आज मैं कह सकता हूँ…
मैं अभी भी तैयारी कर रहा हूँ — परिणाम जो भी हो, मैं अब पहले वाला “डरपोक गाँव का लड़का” नहीं रहा।
मैं जानता हूँ कि UPSC की तैयारी ने मुझे एक बेहतर इंसान बना दिया है।
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निष्कर्ष:
> “अगर तुम्हारे पास सपने देखने का साहस है, तो जगने का भी सामर्थ्य रखो।”
UPSC एक परीक्षा नहीं — यह जीवन का रास्ता है।
संघर्ष, आत्ममंथन, और सेवा की भावना का संगम है।
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क्या आप भी इस रास्ते
पर चलना चाहते हैं?
तो आज ही सिलेबस निकालिए, पहली किताब खोलिए, और अपने दिल से कहिए —
“हाँ, मैं कर सकता हूँ।”
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